प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के इंतजाम में जुटा नोएडा प्रशासन, 15 मई से चलेंगी 5 विशेष ट्रेनें

प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के इंतजाम में जुटा नोएडा प्रशासन, 15 मई से चलेंगी 5 विशेष ट्रेनें

नोएडा : (ब्यूरो)  प्रदेश के शो-विंडो और सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी नोएडा, ग्रेटर नोएडा में फंसे श्रमिकों को उनके घर भेजने के इंतजाम में प्रशासन जुट गया है. 15 मई यानि आज से श्रमिकों को घर भेजने के लिए पांच विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी. उसी के मद्देनजर गुरुवार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने दादरी रेलवे स्टेशन का दौरा किया और रेल अफसरों के साथ तैयारियों के बाबत विचार-विमर्श किया.

 

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से मजदूर रेल की पटरियों और एक्सप्रेस वे हो कर गुजरने वाले सैकड़ों मजदूरो की तस्वीरों के मीडिया और सोशल मीडिया पर दिखाये जाने के बाद सरकार की हो रही आलोचना के बाद अब प्रशासन उन्हें उनके मूल स्थान पर भेजने की तैयारी में जुट गया है. गुरुवार को डीएम सुहास एलवाई ने दादरी रेलवे के अधिकारियों के साथ दादरी स्टेशन का जायजा लिया. इस दौरान डीएम ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ रेलवे के अफसरों के साथ विचार विमर्श किया. 15 मई से दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से 5 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें उनके संबंधित राज्यों के लिए रवाना होंगी. प्रोजेक्ट ट्रेन में 1500 लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रवाना किया जाएगा.

डीएम ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिये गए हैं कि श्रमिक जिन राज्यों के रहने वाले हैं, उन राज्यों से अनुमति प्राप्त कर ली जाए। ट्रेनों के रवाना होने से पूर्व जिला प्रशासन द्वारा रेल विभाग को भुगतान कर दिया जाए. श्रमिक स्पेशल ट्रेन ले जाने वाले यात्रियों की सूची बनाकर विभिन्न स्थानों पर चस्पा किया जाए. ट्रेनों में बोर्डिंग से पूर्व जाने वाले यात्रियों का मेडिकल स्क्रिनिग प्रोटोकॉल का अनुपालन किया जाए. यात्रियों का बोर्डिंग प्वाइंट पर खाने और पानी के पैकेट उपलब्ध कराये जाए. शांति पूर्वक सुरक्षित बोर्डिंग का प्रबंधन किया जाए. बोर्डिंग के दौरान स्टेशन पर सुरक्षा सुरक्षा हेतु पुलिस की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए.

 

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हजारों की संख्या में उद्योग हैं. इसके अलावा बड़े पैमाने पर बिल्डर्स प्रोजेक्ट चलते हैं. उनमें लाखों श्रमिक काम करते हैं. लेकिन, लॉकडाउन के कारण उनके रोजगार खत्म हो गए हैं. हालांकि पहले ही काफी श्रमिक अपने गांवों को लौट चुके हैं, फिर भी बड़ी संख्या अब भी श्रमिक फंसे हुए हैं. अब प्रशासन उन्हें उनके मूल स्थान पर भेजने की तैयारी में जुट गया है.

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