जानिए कब,कहा और कैसे शुरू हुआ विकास दुबे के अपराध का सफर,ये है अपराधिक इतिहास..

जानिए कब,कहा और कैसे शुरू हुआ विकास दुबे के अपराध का सफर,ये है अपराधिक इतिहास..


बाप का बदला लेने के लिए 30 साल पहले किसानों को पीटा,अब नामी बदमाश 
30 सालों से चलता आ रहा था अपराध का सिलसिला 
चंडीगढ़(ब्यूरो):-
विकास दुबे अपराधों की दुनिया का एक ऐसा नाम जिससे हर कोई परिचित है। और गुनाह ऐसे की हर किसी की सुनकर भी रूह कांप जाए। भारत9 न्यूज़ के माध्यम से आज आप विकास दुबे के काले कारनामों का चिठ्ठा पढ़ सकते है। हम आपको बताएंगे कि कब, कहा और कैसे शुरू हुआ विकास का विकास दुबे बनने का सफर और कैसे वो अपने कारनामों पर अकसर ही पर्दा डालता था। या यु कहे कि कैसे वो अपने आपको पुलिस की पैनी नजरों से बचाता था। लेकिन ये कलयुग है साहब यहां हर किसी को अपने गुनाहों का भुकतान करना पड़ता है। कहते है ना जैसा बोएंगे आपको वैसा ही काटने को मिलेगा और वही हुआ विकास दुबे के साथ आखिरकार विकास दुबे के दुनाहो का भी अंत हो गया। चलिए अब आपको विस्तार से बताते है कि कहा और कैसे शुरू हुआ सफर….    
बाप का बदला लेना पड़ा भारी:-
 कानपुर में गुरुवार देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम के आठ जवानों को मौत की नींद सुलाने वाले विकास दुबे का अपराध करने का सिलसिला वर्ष 1990 से शुरू हुआ था। यानि अपराध के लगातार 30 सालों का सफर….  बिकरु गांव निवासी किसान के बेटे विकास ने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए नवादा गांव के किसानों को वर्ष 1990 में पीटा था। 
शिवली थाने में हुआ था पहला मामला दर्ज:-    
गौर हो कि विकास दुबे के खिलाफ शिवली थाने में पहला मामला दर्ज हुआ था। ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में पिछड़ों की हनक को कम करने के लिए विकास को राजनीतिक संरक्षण मिलता गया। उस वक्त पूर्व विधायक नेकचंद्र पांडे ने विकास को संरक्षण दिया था। विकास क्षेत्र में दबंगई के साथ मारपीट करता रहा, थाने पहुंचते ही नेताओं के फोन आने शुरू हो जाते थे। कुछ दिनों बाद तो पुलिस ने भी विकास पर नजर टेढ़ी करनी छोड़ दी थी।
2000 में कॉलेज के सहायक प्रबंधक की गोली मारकर की थी हत्या :- वर्ष 2000 में विकास ने इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडे को गोली मारकर पहला मर्डर किया था। वर्ष 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला को शिवली थाने के भीतर गोली मारकर मौत के घाट उतारकर विकास ने क्षेत्र में अपनी दहशत फैलाई। 
चुनावी रंजिश में ही हुई दोस्तों से दुश्मनी:- 
चुनावी रंजिश में ही विकास की दुश्मनी लल्लन बाजपेई से हुई। शिवली क्षेत्र की जमीनों और बाजार की वसूली में अपना कदम रखने के बाद विकास की क्षेत्र में हनक बढ़ती गई। राजनीतिक संरक्षण और दबंगई के बल पर विकास जिला पंचायत सदस्य चुना गया और आसपास के तीन गांवों में उसके परिवार की ही प्रधानी कायम हो गई। रंजिश के चलते ही उन्होंने अपने सरे करीबियों को भी दुश्मन बना लिया था… वर्ष 2017 में विकास को यूपी एसटीएफ ने किया था गिरफ्तार :- 
विकास के खिलाफ चौबेपुर थाने में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी वसूलना, लूट और फिरौती मांगने समेत कई संगीन धाराओं में 60 मुकदमे दर्ज हैं। विकास के खिलाफ गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जा चुकी है। वर्ष 2017 में विकास को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।
राजनीतिक इतिहास भी चौंकाने वाला :-  
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का राजनीतिक इतिहास भी चौंकाने वाला है। यह जिस पार्टी की सरकार रहती है उसी पार्टी के दमदार नेताओं के संपर्क में रहकर अपनी सुरक्षा करता है। सबसे ज्यादा राजनीतिक पकड़ इसको बसपा की सरकार में मिली। तब से लेकर यह सपा के कई प्रमुख नेताओं और भाजपा के भी कुछ नेताओं के संपर्क में रह रहा था, लेकिन भाजपा के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की वजह से भारतीय जनता पार्टी में उसकी घुसपैठ पिछले 2 साल से नहीं हो पा रही थी।
अब आगे की क्या थी रणनीति :- 
इसको लेकर विकास दुबे ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई संपर्क निकालने की कोशिश की लेकिन भाजपा में उसकी घुसपैठ सीधे तौर पर नहीं हो पाई है, अभी भी वह इसके प्रयास में लगा हुआ था। भाजपा में घुसपैठ का इसका सीधा मतलब था कि वह अपनी सुरक्षा कर सके और अपने काले कारनामों को छुपा सके। बताया जा रहा है कि इससे अलग अपनी राजनीतिक पैठ बनाने के लिए विकास दुबे 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहा था और उसने भाजपा और बसपा दोनों पार्टियों पर अपनी निगाह लगा रखी है।

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