कोरोना महामारी में जनता से जबरन वसूली का काला अध्याय लिख रही है खट्टर सरकार- कांग्रेस

कोरोना महामारी में जनता से जबरन वसूली का काला अध्याय लिख रही है खट्टर सरकार- कांग्रेस

चंडीगढ़ : (ब्यूरो) कोरोना महामारी में जनता से जबरन वसूली का काला अध्याय लिख रही खट्टर सरकार भाजपा सरकार आर्थिक संकट की घड़ी में ‘जजिया कर  वसूली बंद करे कल शाम के अंधेरे में खट्टर सरकर ने प्रदेश के 2.5 करोड़ लोगों से जबरन वसूली का एक नया काला अध्याय लिख डाला। पूरी दुनिया में सरकारें अच्छी नीति व नीयत से लोगों की जेब में पैसा डालने का काम कर रही हैं, पर खट्टर सरकार कोरोना महामारी व आर्थिक संकट के इस काल में टैक्स पर टैक्स लगा खजाना भरने में जुटी है।

खट्टर सरकार द्वारा पेट्रोल-डीज़ल पर लगाया गया अनाप शनाप टैक्स, फल और सब्जी पर लगाई गई मार्केट फीस व HRDF टैक्स तथा आम जनमानस की कमर तोड़ते हुए बस किराए में वृद्धि सरकार की निर्दयता, निकम्मेपन व अहंकार का जीता जागता सबूत है। आर्थिक संकट की इस घड़ी में जख्मों पर मरहम लगाने की बजाय भाजपा-जजपा सरकार जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। इसके सबूत देखिए:-

 

1.​पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स लगा खट्टर सरकार ने 6 साल में हरियाणा की जनता से वसूले ₹42,000 करोड़। केवल पेट्रोल-डीज़ल से सालाना रिकवरी बढ़कर हो जाएगी ₹9,255 करोड़।

खट्टर सरकार ने पिछले 6 वर्षों में VAT वसूली से ₹42,000 करोड़ कमाए हैं (संलग्नक A1):-

(अप्रैल, 2019 से दिसंबर, 2019 तक VAT रिकवरी ₹5,873 करोड़ है। जनवरी, 2020 से मार्च, 2020 तक इसी रिकवरी की औसत में ₹2000 करोड़ वसूली का अनुमान जोड़ा गया है।)

इसके अलावा हरियाणा सरकार GST के माध्यम से तेल रिफाईनरी से पिछले तीन सालों में ही ₹1,668 करोड़ वसूल कर चुकी है (संलग्नक A2)।

यह भी याद रहे कि जब कांग्रेस ने 2014 में सरकार छोड़ी, तो पेट्रोल पर VAT 21 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 26.25 प्रतिशत हो जाएगा। डीज़ल पर VAT 9.24 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 17.22 प्रतिशत हो जाएगा।

खट्टर सरकार ने कल खुद स्वीकारा है कि पेट्रोल व डीज़ल पर क्रमशः ₹1 व ₹1.10 बढ़ाकर व लोगों से ₹732 करोड़ सालाना की अतिरिक्त रिकवरी करेगी। इसके अलावा, रिफाईनरी में ळैज् से ₹650 करोड़ और आएगा। 2019-20 पर पेट्रोल/डीज़ल की VAT रिकवरी को ही अगर 2020-21 में अनुमान लगा लिया जाए, तो खट्टर सरकार अब अकेले पेट्रोल/डीज़ल पर टैक्स से ₹9,255 करोड़ सालाना (₹7,873 करोड़ +732 करोड़ + ₹650 करोड़) कमाएगी।

चौंकाने वाली बात यह है कि भारत सरकार के मुताबिक 29 अप्रैल, 2020 को एक बैरल कच्चा तेल USD17.23 या ₹1304.39 पैसे में खरीदा जा रहा है (संलग्नक A3)। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। यानि प्रति लीटर लागत ₹8.20 है। इसके बावजूद हरियाणा में आज पेट्रोल की कीमत ₹70.21 प्रति लीटर, डीज़ल की कीमत ₹62.07 रु. प्रति लीटर है। यानि सारा मुनाफा मोदी व खट्टर सरकारें मिलकर कमा रही हैं व हरियाणा का किसान-दुकानदार-नौकरीपेशा व्यक्ति-गरीब पिस रहा है।   

2.​केवल बस किराया बढ़ाकर हरियाणा की जनता से ₹170 करोड़ अतिरिक्त वसूले जाएंगे।

कल जारी की गई सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक प्रतिदिन हरियाणा में रोडवेज़ की बसें 10,38,000 किलोमीटर चलती हैं। अगर 30 सवारियों की औसत भी लगाएं, तो 311.4 लाख पैसेंजर किलोमीटर प्रतिदिन बनते हैं। इसे अगर सालाना निकाला जाए तो यह 1,13,661 लाख पैसेंजर किलोमीटर होते हैं। और अगर 15 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोत्तरी को गिना जाए, तो जनता पर ₹170.49 करोड़ प्रतिवर्ष (113661X15 पैसा) का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

 3.​हरियाणा में फल और सब्जी पर कोई मार्केट फीस नहीं थी। 1 प्रतिशत मार्केट फीस लगा व 1 प्रतिशत HRDF लगा भाजपा-जजपा सरकार ने गरीब की कमर तोड़ने का काम किया है।

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि कोरोना महामारी व गंभीर आर्थिक संकट झेल रही हरियाणा की जनता पर खट्टर सरकार ‘जजिया कर लगाना बंद करे।

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