एचआरडी मंत्रालय ने यूजीसी की गाइडलाइन जारी की, स्नातक प्रथम-द्वितीय वर्ष के छात्रों को नहीं देनी होगी परीक्षा

एचआरडी मंत्रालय ने यूजीसी की गाइडलाइन जारी की, स्नातक प्रथम-द्वितीय वर्ष के छात्रों को नहीं देनी होगी परीक्षा

नई दिल्ली : (ब्यूरो) मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी कमेटी की सिफारिशों पर तैयार गाइडलाइन को जारी कर दिया है। हालांकि संस्थानों को कोविड-19 की सेफ्टी गाइडलाइन और सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखना होगा। यूजी और पीजी प्रोग्राम के डिग्री प्रोग्राम के आखिरी वर्ष के छात्रों की परीक्षा जुलाई में होगी। जबकि हालात ठीक न होने पर पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पूर्व सेमेस्टर के 50 फीसदी अंक और इंटरनल अस्समेंट के 50 फीसदी अंक के आधार पर ग्रेड मिलेंगे। जिन छात्रों को ग्रेड देकर प्रमोट किया जाएगा, वे हालात ठीक होने के बाद जब संस्थान खुलेंगे तो दोबारा सेमेस्टर परीक्षा दे सकते हैं। जिन शहरों या जिलों में हालात ठीक हैं, वहां पर पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों की जुलाई में परीक्षा होगी। विश्वविद्यालयों को अपने अकेडमिक कैलेंडर के आधार पर जल्दी से जल्दी ऑनलाइन, ऑफलाइन या पेपर-पेन (वस्तुनिष्ठ) आधारित परीक्षा करवानी होगी। परीक्षा का समय तीन घंटे की बजाय दो घंटे का होगा। परीक्षा की सूचना कम से कम एक सप्ताह पहले देनी होगी। लॉकडाउन अवधि में सभी छात्रों व शोध छात्रों की हाजिरी उपस्थित मानी जाएगी। वर्तमान शैक्षणिक सत्र केलिए कैरी फारॅवर्ड (ऐसे विषय जिसमें छात्र फेल हों) योजना को मंजूरी मिले।विवि पांच की बजाए छह दिन खुलेंगे विश्वविद्यालय पांच की बजाय छह दिन खुलेंगे। यूजीसी और सभी विश्वविद्यालयों में कोविड-19 सेल गठित होंगे। लैब आधारित प्रयोग की बजाय संस्थान सॉफटवेयर संचालित परियोजना पर काम करेंगे। यूजीसी गाइडलाइन के तहत संस्थान काम करेंगे, लेकिन वे अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। वे इन गाइडलाइन में बदलाव कर सकते हैं। पीएचडी, एमफिल स्कॉलर्स को छह महीने का अतिरिक्त समय पीएचडी, एमफिल स्कॉलर्स को डिग्री पूरी करने और थीसिस जमा करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा। यह अवधि सामान्य रूप से मिलेगी। थीसिस जमा करने और दाखिले के लिए वाइवा गूगल, स्काइप, माइक्रोसॉफ्ट तकनीक या फिर वीडियो कांफ्रेेसिंग के माध्यम से जमा होगी। 75 फीसदी पाठयक्रम कक्षा तो 25 ऑनलाइन क्लासेज में यूजीसी ने कहा कि शिक्षकों को अब तकनीक से पढ़ाई को जोड़ना होगा। ऐसे में 75 फीसदी पाठ्यक्रम वे फेस टू फेस कक्षा में बिठाकर पूरा कर सकते हैं, लेकिन 25 फीसदी शनिवार या रविवार को घर बैठे ऑनलाइन क्लास में पूरा करना होगा। इसके लिए बाकायदा शिक्षकों को वीडियो कांफ्रेसिंग से जुड़ना सीखाया जाए

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