आवारा पशुओं के साथ दोस्ती कर की मिसाल कायम, 12 साल का आर्यन है आवारा पशुओं का बेस्ट फ्रैंड….

आवारा पशुओं के साथ दोस्ती कर की मिसाल कायम, 12 साल का आर्यन है आवारा पशुओं का बेस्ट फ्रैंड....

सुंदरनगर का 12 वर्षीय आर्यन आवारा पशुओं का बेस्ट फ्रेंड
लॉक डाउन में आवारा पशुओं को बनाया दोस्त
रोजाना घर पर खाने की आस में आते हैं दर्जनों आवारा जानवर
रास्ते में मिलने वाले हर पशु को देता है खाने की सामग्री

सुंदरनगर (नितेश सैनी)। आज का दौर ऐसा आ चुका है कि जो पशु इंसान के काम का नहीं रहता वह सड़कों पर आवारा छोड़ दिया जाता है, लेकिन ऐसे में कई लोग ऐसे भी है जो इन पशुओं के लिए एक मसीह बनकर आते है। इंसानों द्वारा छोड़े गए आवारा पशुओं का सहारा बन रहा है सुंदरनगर शहर का 12 वर्षीय नन्हा आर्यन ठाकुर। सुंदरनगर शहर में एमएलएसएम कॉलेज के पास रहने वाला आर्यन ठाकुर आवारा पशुओं के साथ दोस्ती करने में माहिर हो गया है। आर्यन के पिता राजेश ठाकुर भी आवारा पशुओं के साथ काफी लगाव रखते हैं और आर्यन को यह सीख अपने पिता से ही मिली है। लॉक डाउन की स्थिति में जब आवारा पशुओं के सामने खाने का संकट मंडराने लगा तो आर्यन ने इनकी और ज्यादा मदद करने की सोची और मदद की भी। आर्यन न तेज धूप देखता है और न ही बारिश। रोजाना अपनी साइकिल निकालकर अपने घर के आसपास वाले सभी आवारा पशुओं के लिए खाद्य सामग्री के साथ मिलने पहुंच जाता है।

चाहे गाय हो, बैल हो, कुत्ता हो, बंदर हो या अन्य कोई जानवर हो, आर्यन सभी को एक समान नजर से देखता है और जितना संभव हो सके उनके लिए खाने का इंतजाम करता है। यहां तक की आर्यन ने अपनी सारी पॉकेट मनी भी इसी काम पर खर्च कर दी है। अब नतीजा यह हो गया है कि आर्यन के घर आवारा पशुओं ने खुद ही आना शुरू कर दिया है। आर्यन बताता है कि उसने इन सभी से दोस्ती कर ली है और उसी के नाते यह उसके घर पर आते हैं। जब तक कुछ खाने को न दूं तब तक जाते भी नहीं। आजकल पशुओं के साथ हो रहे बूरे बर्ताव को लेकर आर्यन काफी ज्यादा आहत है। आर्यन बताता है कि सोशल मीडिया पर जब वह इस तरह की चीजें देखता है तो उसका मन काफी दुखी होता है। आर्यन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पशु के साथ बूरा व्यवहार न करें और जितना हो सके इन बेजुबानों की मदद के लिए आगे आएं। क्योंकि हम सभी मिलकर इनकी ताकत बन सकते हैं।

12 वर्षीय आर्यन इतनी छोटी सी उम्र में कई समझदारी भरे काम कर रहा है। पिता राजेश ठाकुर से फोटोग्राफी का बारीकियां सीखकर अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। वहीं इसी उम्र में करसत करने का जनून भी खूब पाल लिया है। आर्यन की मां मंजू ठाकुर बताती हैं कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है जो इंसानियत के लिए एक मिसाल बन रहा है और बेजुबान पशुओं की सेवा कर रहा है। छोटी सी उम्र में आर्यन ने जो कर दिखाया है शायद उसे करने की हिम्मत एक आम इंसान अपनी पूरी उम्र में नहीं दिखा पाता। आर्यन जैसे और भी बहुत से बच्चे हैं जो समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि बच्चों के इन संदेशों से भी लोग सीख नहीं ले पा रहे।

Published By: Pooja Saini

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