HSGPC चुनाव में कौन बनेगा सरताज ?13 अगस्त को होने है चुनाव !

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव में दादूवाल व झींडा गुट में जोरदार मुकाबला      
एक अन्य उम्मीदवार ने ताल ठोंक कहा सत्ता सन्तुलन उसके हाथ  
गुहला चीका (ब्यूरो) :- 
  हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव को लेकर पूर्व प्रधान जगदीश झींडा गुट व कमेटी के कार्यकारी प्रधान जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल में जोरदार मुकाबला दिखाई दे रहा है। मालूम रहे कि झींडा गुट की तरफ से जहां जसबीर खालसा चुनावी दंगल में हैं, वहीं दादूवाल गुट की तरफ से स्वयं बलजीत सिंह दादूवाल मैदान में हैं। परंतु दोनों गुटों के प्रत्याशियों में आमने सामने दिखाई देने वाले इस चुनावी दंगल में एक अन्य सदस्य स्वर्ण सिंह रतिया ने चुनावी तड़का लगाते हुए अपनी ताल ठोंक दी है और दावा किया है कि चुनावी सत्ता सन्तुलन अब साफ तौर पर उनके हाथ में आ गया है।

मालूम रहे कि आज नाम वापिसी की तारीख मुकर्रर की गई थी जिसके चलते दो उम्मीदवारों हरप्रीत सिंह नरोला व जसबीर सिंह भट्टी ने अपना नामांकन वापिस ले लिया। इसी के साथ यह क्यास भी लगाए जा रहे थे कि तीसरे उम्मीदवार स्वर्ण सिंह रतिया भी अपना नाम वापिस ले लेंगे और प्रबन्धक कमेटी का चुनाव सीधे तौर पर दोनों गुटों के प्रत्याशियों में आमने सामने का हो जाएगा परन्तु ऐसा हुआ नहीं अलबत्ता स्वर्ण सिंह रतिया ने आश्चर्यजनक ढंग से अपनी ताल ठोंक इस चुनाव को बेशक तिकोना ना भी बनाया हो अलबत्ता यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने चुनाव को रोचक जरूर बना दिया है। इस बात के भी क्यास लगाए जा रहे हैं कि चुनावी दंगल में स्वर्ण सिंह रतिया शतरंज के एक मोहरे के तौर पर अपनी चाल चल रहे हैं जबकि भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार सच्चाई यह है कि रतिया रूपी मोहरे की गिटियां चल कोई और रहा है। इस बीच चुनाव अधिकारी दर्शन सिंह बराड़ ने बताया कि नामांकन वापिस लेने का समय समाप्त हो गया है और मैदान में तीन प्रत्याशी रह गए हैं। उन्होंने बताया कि 13 अगस्त को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चीका स्थित मुख्यालय छटी एवं नोवीं पातशाही गुरुद्वारा साहिब में वोट पड़ेंगी और जीत के लिए 36 में से 19 वोट लेने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाएगा। इस बीच राजनीतिक पण्डितों के अनुसार यदि तीसरा उम्मीदवार स्वर्ण सिंह रतिया उक्त दोनों प्रत्याशियों में से किसी को वोट न करके स्वयं को वोट करेगा और दोनों गुटों में से कुछ वोट अपने पक्ष में गिरवाने में सफल हो गया तो फिर चुनावी परिणाम चोंकाने वाले भी सामने आ सकते हैं। बहरहाल दादूवाल व झींडा गुट दोनों अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। देखते हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है?

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