सरकार की गल्त नीतियों के कारण किसान, आढ़ती, व्यापारी और छोटे दूकानदार सब परेशान: सुशील गुप्ता

सरकार की गल्त नीतियों के कारण किसान, आढ़ती, व्यापारी और छोटे दूकानदार सब परेशान: सुशील गुप्ता

सरकार की गल्त नीतियों के कारण किसान, आढ़ती, व्यापारी और छोटे दूकानदार सब परेशान: सुशील गुप्ता

कहा: किसानों को मिले उनकी बरसात एवं लॉकडाउन की वजह से खराब हुई फस्ल का उचित मुआवजा

पंचकूला/चंडीगढ़,21 अप्रैल(भारत 9 ब्यूरो): आम आदमी पार्टी के हरियाणा के संयोजक राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता का कहना है कि हरियाणा सरकार की गल्त नीतियों के चलते जहां एक ओर किसान एवं आढ़ती परेशान चल रहे हैं, वहीं वे कुदरत की मार भी झेल रहे हैं। कोविड़-19 की वजह से वे न तो समय पर अपनी फसल को समेट पायें हैं और ऊपर से बरसात के कारण कई जगहों पर किसानों की फस्लें भी खराब हुई हैं। उन्होंने किसानों की इस हालात की भी समीक्षा किये जाने की मांग की। साथ ही उन्होंने किसानों को उसकी फसल की खरीद का उचित दाम दिये जाने की भी मांग की है।

आज यहां जारी एक ब्यान में राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि प्रदेेश भर से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार किसानों को अपनी फसल बेचने में काफी दिक्कतें आ रहीं हैं। वे ऑनलाईन पंजीकरण कर मेरी फसल मेरा ब्यौरा भर कर अपनी फ सल नहीं बेच पा रहे। इसके आलावा उन्हें सरकार की ओर से गेहूं खरीद केंद्रों की सही ढंग से नियुक्ति न कर पाने की वजह से भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनके साथ ही आढ़ती भी दुखी हो रहें हैं। सरकार और आढ़तियों के बीच ठीक से समन्वय नहीं बन पा रहा, जिसके चलते वे सब हड़ताल करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरसों खरीद के दौरान सरकारी व्यवस्था पूरी तरह से दुरुस्त नजऱ नहीं आ रही है। इसके आलावा कई स्थानों पर किसानों की फसल बरसात की भेंट भी चढ़ गई है, सरकार को उन किसानों का भी ध्यान करना चाहिए और उन्हें तुरंत इसके लिए राहत देनी चाहिए।

गुप्ता ने कहा चूंकि सरसों की पैदावार हरियाणा के कुछ ही जिलों मे होती है और सरकार अभी तक सरसों की ही पूरी तरह से खऱीद नहीं कर पाई है, ऐसे में जबकि गेहूं पूरे हरियाणा में उगाया जाता है और उसकी पैदावार सरसों से कहीं ज़्यादा होती है। इसी लिए राज्य के किसानों को  इस बात का डर सता रहा है कि गेहूं की ब्रिकी में और ज्यादा मुश्किलें हों सकती हंै।  और ऑनलाईन फस्ल की ब्रिकी में तो और भी बड़ी दिक्कतें  और खामियां हैं, जोकि पिछले कई सीजऩ में स्पष्ट हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस लिए राज्य सरकार को चाहिए कि परंपरागत खऱीद प्रक्रिया के तहत आढ़तियों को एक बार फिर से इन फस्लों की खरीद की यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपे। क्येंाकि आढ़तियों के सहयोग के बिना किसान के दाने-दाने की खऱीद संभव नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब में भी ऐसा ही हो रहा है, जिसनेे सरसों की खरीदने के तुरंत बाद गेहूं की भी करीब करीब 50 फीसदी फसल की खऱीद पूरी कर ली है। जबकि दूसरी ओर हरियाणा की सत्तारुढ़ सरकार रोजाना खऱीद प्रक्रिया में लगातार नये-नये प्रयोग कर रही है।

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