रेप केस निपटाने को 7 फास्ट ट्रैक, बाल अपराधों के लिए 3 विशेष और 10 पारिवारिक बनेंगी कोर्ट

रेप केस निपटाने को 7 फास्ट ट्रैक, बाल अपराधों के लिए 3 विशेष और 10 पारिवारिक बनेंगी कोर्ट

पंजाब में अब महिलाओं और बच्चों से जुडे अपराधों के मामलों को लेकर सुनवाई तेजी से होगी। सरकार नहीं चाहती है कि इन मामलों से जुडे पीडितों को इंसाफ के लिए कई साल तक भटकना पड़े। ऐसे मामलों को लेकर पंजाब सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया है। सरकार ने यह फैसला सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की मीटिंग के दौरान लिया गया। कैबिनेट ने रेप के मामलों की सुनवाई के लिए 7 फास्ट ट्रैक, बच्चों के साथ हुए अपराधों के लिए 3 विशेष और 10 पारिवारिक कोर्ट को स्थापित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं। इन अदालतों के स्थापित होने से सूबे में अदालतों में चल रहे मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी।

7 फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए 70 पदों को किया जाएगा सृजित
मंत्रीमंडल द्वारा बलात्कार के मामलों के निपटारे के लिए सात फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना के लिए मंजूरी दी गई है जिनके कामकाज के लिए 70 पदों का सृजन किया जाएगा। इनमें से चार अदालतें लुधियाना में और एक-एक अदालत अमृतसर, जालंधर और फिरोजपुर में स्थापित होगी।

7 सेशन जज और 63 अन्य स्टाफ होगा नियुक्त
अतिरिक्त और जिला सैशन जजों के सात अतिरिक्त पद और सहायक अमले के 63 पदों के लिए कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है। इन अदालतों को स्थापित होने वाले खर्च को लेकर भी अनुमान लगा लिया गया है। इन अदालतों को स्थापित किए जाने पर प्रति वर्ष लगभग 3.57 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

यह होगा अदालतें स्थापित करने का फायदा
इन अदालतों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सूबे में रेप से जुडे लंबित मामलों को बलात्कार के लंबित पड़े मामलों से निपटने के लिए क्रिमिनल लॉ (संशोधन) एक्ट, 2018 के उपबंधों और धाराओं को अमली रूप देंगी। इन अदालतों द्वारा ऐसे मामलों में मुकदमों के फैसले दो महीने की समय-सीमा के अंदर करके लंबित मामलों की संख्या घटाने के लिए भूमिका अदा की जायेगी। साल 2018 की सी.आर.पी.सी की धारा 173 में संशोधन के अनुसार बलात्कार मामलों के ट्रायल का फ़ैसला दो महीने के अंदर-अंदर किया जाना है।

पोस्को मामलों के लिए विशेष अदालतें
कैबिनेट द्वारा बच्चों को कामुक अपराधों से सुरक्षित रखने बारे एक्ट (पोस्को एक्ट) के तहत दर्ज मामलों के मुकदमों के लिए सालाना 2.57 करोड़ के अनुमानित ख़र्च से विशेष अदालतों की स्थापना के लिए 45 पदों की सृजना करने के लिए मंजूरी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छा ज़ाहिर की गई थी कि उन राज्य सरकारों द्वारा बच्चों के साथ हुए बलात्कार के मामलों के मुकदमों के लिए विशेष अदालतें स्थापित की जांए, जहां ऐसे लंबित पड़े मामलों की संख्या 100 से ज्य़ादा है।

विशेष अदालतों के लिए 45 पद होंगे सृजित
मौजूदा समय में बच्चों के साथ बलात्कार के लंबित पड़े मामलों की संख्या लुधियाना में 206 और जालंधर में 125 है। जिसको ध्यान में रखते हुए कैबिनेट द्वारा लुधियाना में दो और जालंधर में एक स्पेशल कोर्ट की स्थापना के लिए मंजूरी दी गई है। कैबिनेट द्वारा इसके साथ ही इन अदालतों के लिए अतिरिक्त जिला जजों और उप जिला अटार्नी की तीन-तीन पदों और 39 सहायक अमले के पदों की (कुल 45 पदों ) सृजना करने के लिए मंजूरी दी गई है।

फैमिली कोर्ट पर 5.55 करोड रुपये खर्च आएगा
कैबिनेट द्वारा राज्य के 10 जिलों में 5.55 करोड़ की सालाना अनुमानित लागत से 10 पारिवारिक अदालतों की स्थापना के लिए मंजूरी दी गई है। कैबिनेट द्वारा जिला जज/जि़ला सैशन जज के नेतृत्व में (8 सहायक अमला सदस्यों समेत) चलने वाली इन अदालतों के लिए 90 पदों की सृजना करने के लिए मंजूरी दी गई है। मौजूदा समय में पंजाब के 12 जिलों में यह फैमिली कोर्ट चल रही हैं।

बाकी जिलों में फैमिली कोर्ट की जाएगी स्थापित
यह नई अदालतें बाकी 10 जिलों में स्थापित होंगी जिनमें फतेहगढ़ साहिब, फिऱोज़पुर, फाजि़ल्का, कपूरथला, मानसा, रूपनगर, संगरूर, श्री मुक्तसर साहिब, एस.ए.एस नगर मोहाली और तरन तारन शामिल हैं। इन अदालतों के कार्यशील होने से विवाह संबंधी लंबित मामलों के निपटारे से बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। फैमिली कोर्ट मुख्य रूप में विवाह से संबंधित मामलों जैसे विवाह के ख़ात्मे, वैवाहिक हकों की बहाली, वैवाहिक पक्षों की जायदाद, बच्चों के पालन-पोषण से जुड़े हकों और रख-रखाव के मामलों का निपटारा किया जाता है।

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