नए सत्र में शराब के ठेके बरकरार रहें,अभी तक केवल सात प्रस्ताव ही मिले हैं।

नए सत्र में शराब के ठेके बरकरार रहें,अभी तक केवल सात प्रस्ताव ही  मिले हैं।

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने भले ही गांवों में शराबबंदी का प्रस्ताव दिया है, लेकिन खुद गांव वाले नहीं चाहते कि उनके गांवों में शराब ठेके न खुलें। इसे गांवों की पार्टीबाजी माना जाए या फिर शराब ठेके खुलवाने की चाह, राज्य में सिर्फ सात प्रस्ताव ऐसे आए हैैं, जो चाहते हैैं कि उनके गांव में शराब के ठेके न खुलें। यानी अधिकतर ग्रामीण इस हक में हैैं कि उनके गांवों में पहले से खुले शराब ठेके बंद नहीं होने चाहिए और नए सत्र में शराब के ठेके बरकरार रहें।

भाजपा सरकार में साझीदार जननायक जनता पार्टी ने गांवों में शराबबंदी का वादा प्रदेश की जनता से किया था, जिसके बाद सरकार ने प्रस्ताव दिया कि जो ग्राम सभा गांव के दस फीसद मतदाताओं के साथ यह प्रस्ताव देगी कि उनके गांव में शराब का ठेका न खुले, उस गांव में शराब का ठेका नहीं खोला जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव देने की समय सीमा 31 दिसंबर निर्धारित की गई थी, जो खत्म हो चुकी है।

आबकारी एवं कराधान विभाग को अभी तक केवल सात प्रस्ताव ही ऐसे मिले हैं जो नियमानुसार पारित किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी एवं कराधान विभाग ने सभी जिलों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। खबर है कि ग्रामीणों ने जिला कार्यालयों में यह प्रस्ताव जमा करवाए हैं।

हालांकि जिला कार्यालयों में ऐसी ग्राम सभाओं के प्रस्तावों को खास तरजीह नहीं दी जा रही, जिस कारण गांव वाले निराश होकर वापस लौट रहे हैैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में सरकार की आशा के अनुरूप इस योजना को ग्रामीणों का प्रोत्साहन नहीं मिला है, जिसके चलते 15 जनवरी तक सभी जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।

क्या है हरियाणा में शराब ठेकों की स्थिति

हरियाणा में इस समय शराब के कुल 2259 ठेके हैं। 950 ग्रामीण अंचल में तो 765 शराब ठेके ग्रामीण-अर्बन की संयुक्त सीमा में चल रहे हैं। प्रदेश में कुल 6848 गांव तथा 6222 पंचायतें हैं। शराब ठेकों के लिए एक अप्रैल 2019 से शुरू हुए वर्ष के दौरान कुल 304 पंचायतों द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में शराब के ठेके न खोलने के संबंध में प्रस्ताव पारित कर आबकारी एवं कराधान विभाग को भेजा गया, जिनमें से केवल 57 पंचायतों के प्रस्तावों पर ही विभाग ने अपनी स्वीकृति प्रदान करने की मोहर लगाई थी। 48 पंचायतों द्वारा पारित प्रस्तावों में कई तरह की खामियां होने के चलते उन्हें खारिज कर दिया गया था। इसके अलावा 199 प्रस्ताव ऐसे थे जो या तो अधूरे थे या तय समय सीमा के बाद विभाग के पास दाखिल किए गए।

जिलों से रिपोर्ट आने के बाद तय होंगी नई साइट

अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त कम कलक्टर योगेश कुमार का कहना है कि बहुत से गांवों ने अपने स्तर पर प्रस्ताव पारित कर जिला स्तरीय कार्यालयों में जमा करवाए हैं। कई जगह ग्रामीणों ने जानकारी के अभाव में जिला उपायुक्त कार्यालयों को प्रस्ताव भेजे हैं। सभी जिलों को निर्देश जारी कर 15 जनवरी तक रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट आने के बाद सभी आवेदनों की छंटनी करके 31 जनवरी तक अंतिम रिपोर्ट तैयार करके नए शराब ठेकों की साइटों का सृजन किया जाएगा।

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