जिन्दगी से हारे तो मौत को लगाया गले, यमुनानगर में दस दिनों में पांच सुसाइड केस आए सामने, मनोचिकित्सक ने बताए सुसाइड के कारण…

जिन्दगी से हारे तो मौत को लगाया गले, यमुनानगर में दस दिनों में पांच सुसाइड केस आए सामने, मनोचिकित्सक ने बताए सुसाइड के कारण...

यमुनानगर(सुमित ओबरॉय)। मौत को मानों लोगों ने एक तरह से मजाक का जरिया बना लिया हो। एक तरफ जहां बॉलीवुड अदाकार सुशांत सिंह के सुसाइड को लेकर पूरे देश भर में चर्चा है, वही हालही में यमुनानगर में पिछले दस दिनों में 5 सुसाइड केस सामने आए है।ऐसे में मनोचिकित्सको का कहना है कि जब मानसिक तनाव इतना ज्यादा बढ़ जाता है तो उस वक्त मौत का डर भी खत्म हो जाता है और उन्हें सुसाइड करना ही सबसे आसान लगता है। ऐसे में उनके मानसिक तनाव को कम करने की जरूरत उन्हें समझने की जरूरत है। जिस प्रकार हम शरीर मे किसी भी बीमारी होने पर उसका ईलाज करते है। इसी में मानसिक तनाव को खत्म करने और दिमाग को पढ़ने की जरूरत है ताकि उसका अकेलापन दूर हो और ऐसे में उसे सुसाइड करने से बचाया जा सकता है। ऐसे में बच्चों के माँ बाप को उन्हें समझने और समय देने की जरूरत है ताकि उनकी मानसिक स्थिति के बारे में पता चल सके और कोई मानसिक अवसाद न पैदा हो।

लाइफ एंड सराउंडिंग मैनेजमेंट की निदेशक डॉ. अलका वर्मा ने बताया कि सुसाइड के पीछे हम जो बात मानते हैं वह उनकी साइकोलॉजी, मानसिकता है उनको कोई समझ नहीं पाता। काफी समय से परेशान होने और समाधान नहीं मिलने पर निराश हो जाने के कारण ऐसे लोग सुसाइड का रास्ता चूनते है। उनको कोई ऐसा मिला नहीं जो उनको उस चीज से बाहर निकाल सके। उस सिचुएशन से बाहर निकाल सके। इसलिए उनको सुसाइड करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बहुत सारे कारण हैं अगर उनको समझाया जाता तो वह ऐसा कभी ना करते। इसके कारण अलग-अलग हैं कोई स्टडी के लिए कोई फाइनेंशियल क्राइसिस के लिए हर सुसाइड के अलग कारण होते हैं। लेकिन बात वही है कि किसी न किसी बात से हताश होकर निराश होकर क्योंकि वह जिंदगी उनको संभालनी नहीं आती। उनको अपनी सोच संभालनी नहीं आती इसलिए वह ऐसा काम करते हैं। डॉ अलका वर्मा ने बताया कि सुसाइड करने वालों में कोई स्पेसिफिक उम्र नहीं होती। इसमें कोई 17 साल की उम्र में कर रहा है, कोई 14 साल में कर रहा है, कोई 34 साल में कर रहा है तो कोई 60 साल की उम्र में करता है।

जब तक उन्हें सहन करने की क्षमता होती है पेशेंस को डील करने की तब तक वह करते रहते हैं। जब उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता है तो अपने आप को खत्म कर देते है। उन्हें अपनी जिंदगी खुश नहीं लगती। हमें सच्चाई समझ नहीं पड़ेगी। हमें समझना पड़ेगा कि हम किस वजह से परेशान हैं। उस वजह के लिए हम बने हैं या नहीं बने हैं। हम उस वजह को समझ कर आगे भी बढ़ सकते हैं और उस वजह को खत्म करके भी आगे बढ़ सकते हैं। क्योंकि जरूरी नहीं है कि अगर आप निराश हुए तो कहीं ना कहीं या को धोखा मिल रहा है या सामने वाला काबिल नहीं है या आप उसके काबिल नही है हो सकता है आपने कुछ अलग टैलेंट हो। अलग टैलेंट के लेवल पर अपनी कैपेबिलिटी और कैपेसिटी को पहचान कर उन चीजों को दूर रख के ये नहीं सोचना कि लोग क्या कहेंगे ।जिंदगी बहुत सुंदर है इसकी अपनी मानसिकता को समझने की जरूरत है इससे सुसाइड से कोसों दूर हो सकते हैं। बहुत सारे लोगों की जिंदगी बच सकती है।

बच्चों को अपने मां-बाप का स्पोर्ट चाहिए हम उन्हें स्पेशल एजुकेट करते हैं। आप घर आकर मोबाइल देखते हो सीरियल देखते हो उसकी बजाय एक घंटा से अलग से निकाला जाए जब सारे परिवार के लोग इकट्ठा बैठे हैं सारे दिन में क्या हुआ पति पत्नी एक दूसरे से बातचीत करें पूछें इस बात में इगो नहीं लानी है। जैसे आपका काम, खाना जरूरी है, वैसे ही बच्चे के साथ टाइम स्पेंड करना भी बहुत जरूरी है। यह एजुकेशन है आप बच्चे को पढ़ा रहे हैं पैसा लगा रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है। वह अनुभव क्या कर रहा है क्या महसूस कर रहा है उसकी सोच कहां जा रही है ।तो मां-बाप को चाहिए सारा दिन जब बच्चा मां बाप से नहीं मिलेगा मां-बाप थके हुए आएंगे बच्चे भी क्या करेंगे और मां-बाप भी क्या करेंगे। लेकिन एक कोआर्डिनेशन की जरूरत है एक दूसरे को समझे कोई टाइम टेबल बनाएं तो हर बात ही संभव है।

Published By: Pooja Saini

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