जाने क्या होता है टाइम कैप्सूल क्यों दबाया जाता है इसे बड़ी- बड़ी स्मारकों  के नीचे !

जाने क्या होता है टाइम कैप्सूल क्यों दबाया जाता है इसे बड़ी- बड़ी स्मारकों  के नीचे !

200 फ़ीट नीचे कंटनेर के रूप में किया जाता है उपयोग !

लखनऊ(ब्यूरो) :-
 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की नीव पीएम के हाथों रखी जायेगी…,जिसकी तैयारियां ज़ोरो शोरो से चल रही है मंदिर के निर्माण केसाथ-साथ एक बात भी प्रकाश में आई है और वो है ‘टाइम कैप्सूल’। दरअसल अयोध्या में राम मंदिर की नींव में 200  फीट नीचे एककंटेनर के रूप में ‘टाइम कैप्सूल’ डाला जाएगा, जो कि ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में जाना जाएगा, जिससे हजारों सालों बाद भी अगर किसी को खुदाई में कैप्सूल मिले तो उस वक्त के लोगों को राम जन्मभूमि के बारे में हर बात पता चल सके।
दरअसल’टाइम कैप्सूल’ खास सामग्री से बना हुआ एक कंटेनर :-  जिसके ऊपर किसी मौसम का असर नहीं होता है और ना ही सड़ता या गलता है, इसे जमीन के अंदर काफी गहराई में दफनाया जाता है, इस पर किसी केमिकल का भी असर नहीं होता है और यहजस की तस धरती के अंदर रहता है। राम मंदिर के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘टाइम कैप्सूल’ मेंधातुओं की कई परतों का इस्तेमाल किया जाएगा और उसमें हिंदी अंग्रेजी और संस्कृतभाषा में जानकारी अंकित होगी।

भारत में पहले भी ‘टाइमकैप्सूल’ का इस्तेमाल होता रहा है। साल 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लालकिले के 32 फीट नीचे अपने हाथ से ‘टाइम कैप्सूल’ डालाथा, जिसे कि ‘कालपत्र’ नाम दिया गया था, हालांकिउस वक्त ये एक विवाद का कारण बन गया था, इंदिरागांधी के ऊपर अपने परिवार को महिमा मंडित करने का आरोप लगा था, उस ‘टाइमकैप्सूल’ में भारत की आजादी के 25 सालों का जिक्र था, जिसमें संघर्ष की पूरी दास्तां थी।

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